मोहब्बत नाम है जिसका वो ऐसी क़ैद है यारों, कि उम्रें बीत जाती हैं सजा पूरी नहीं होती।

वजह नफरतों की तलाशी जाती है, मोहब्बत तो बिन वजह ही हो जाती है।

राज़ खोल देते हैं नाजुक से इशारे अक्सर, कितनी खामोश मोहब्बत की जुबान होती है।

लोगों ने रोज ही नया कुछ माँगा खुदा से, एक हम ही हैं जो तेरे ख्याल से आगे न गये।

एक उमर बीत चली है तुझे चाहते हुए, तू आज भी बेखबर है कल की तरह।

राह में मिले थे हम, राहें नसीब बन गईं, ना तू अपने घर गया, ना हम अपने घर गये।